राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड
( शहरी विकास मंत्रालय ,भारत सरकार )
नया क्‍या है English

नीतियां और रणनीतियां

17 सितम्‍बर, 2005 को अधिसूचित राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्रीय योजना-2021 का उद्देश्‍य, पूरे राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र को वैश्‍विक दृष्‍टि से श्रेष्‍ठ क्षेत्र के रुप में विकसित करना है। योजना का लक्ष्‍य क्षेत्र को आर्थिक रुप से संवृद्ध करना और इसका संतुलित विकास करना है और (क) दिल्‍ली के आर्थिक विकास के आवेग को समाहित करने का सामर्थय रखने वाले क्षेत्रीय अधिवासों की पहचान और विकास द्वारा भावी वृद्धि के लिए उपयुक्‍त आर्थिक आधार उपलब्‍ध कराने; (ख) पहचान किए गए ऐसे अधिवासों में संतुलित क्षेत्रीय विकास को अवलम्‍ब प्रदान करने के लिए भूमि उपयोग प्रतिरुपों के साथ भलीभांति एकीकृत दक्ष एवं मितव्‍ययी रेल और सडक आधारित परिवहन नेटवर्क (जिसमें जन परिवहन प्रणालियां सम्‍मिलित हैं) उपलब्‍ध कराने; (ग) एनसीआर के विकास की प्रक्रिया में घटित हो सकने वाले प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभाव को न्‍यूनतम करने; (घ) चुने शहरी अधिवासों का विकास शहरी परिवहन, विद्युत, दूर-संचार, पेयजल, सीवरेज और अपवहन जैसी अवसंरचना सुविधाओं, जिनकी तुलना दिल्‍ली के साथ की जा सके, के साथ करने; (ड) युक्‍तियुक्‍त भूमि उपयोग पद्धति उपलब्‍ध कराने; और (च) जीवन की गुणवत्‍ता में सुधार के लिए क्षेत्र में सतत विकास को बढावा देने के माध्‍यम से इन्‍हें प्राप्‍त करने का प्रयत्‍न किया गया है।

एनसीआर की जनसंख्‍या का अनुमान 2021 तक 641.38 लाख लगाया गया है। इस अनुमान और एनसीआर के लिए क्षेत्रीय योजना-2021 में वर्णित नीतियों के आधार पर, यह आशा व्‍यक्‍त की गई है कि एनसीटी-दिल्‍ली उप क्षेत्र की जनसंख्‍या 2021 तक 225 लाख हो जाएगी और हरियाणा, राजस्‍थान उप क्षेत्र और उत्‍तर प्रदेश उप क्षेत्र की जनसंख्‍या क्रमश: 163.50 लाख, 49.38 लाख और 203.50 लाख हो जाएगी। एनसीआर के लिए क्षेत्रीय योजना-2021 के प्रमुख दबाव के क्षेत्रों में सम्‍मिलित हैं:

  1. प्राकृतिक विशेषताओं जिसमें प्राकृतिक आपदाओं और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों की दृष्‍टि से अति संवेदनशीलता सम्‍मिलित है, के सावधानीपूर्वक परीक्षण से सामने आने वाली सामंजस्‍यता प्रतिरुप के संदर्भ में क्षेत्रीय स्‍तर पर भूमि उपयोगों का निर्धारण
  2. प्रमुख गतिविधियों को आकर्षित करने के लिए विकास के सशक्‍त बिंदू के रुप में मेट्रो और क्षेत्रीय केन्‍द्रों का विकास करने का प्रस्‍ताव करना
  3. क्षेत्रीय परिवहन संबद्धता और जनयात्री प्रणाली उपलब्‍ध कराना
  4. दिल्‍ली के चारों ओर परिधीय एक्‍सप्रेस-वे और परिक्रमा रेल कॉरीडोर का निर्माण
  5. एनसीआर में कस्‍बों में महत्‍वपूर्ण शहरी अवसंरचनाओं (परिवहन, विद्युत, जल आपूर्ति, सीवरेज, अपवहन) का विकास
  6. एनसीटी-दल्‍ली के बाहर मॉडल औद्योगिक एस्‍टेटों, विशेष आर्थिक जोनों के माध्‍यम से क्षेत्र की अर्थ-व्‍यवस्‍था का विकास
 
खंड
परिवहन
ऊर्जा
जल
सीवरेज
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
ड्रेनेज
सिंचाई
दूरसंचार
आश्रय
सामाजिक अवसंरचना
विरासत और पर्यटन
पर्यावरण
आपदा प्रबंधन

राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय योजना-2021 में छ: स्‍तरीय अधिवास प्रणाली का प्रस्‍ताव किया गया है जिसमें मेट्रो केन्‍द्र, क्षेत्रीय केन्‍द्र, उप-क्षेत्रीय केन्‍द्र, सेवा केन्‍द्र, केन्‍द्रीय ग्राम और मूल ग्राम सम्‍मिलित होंगे। चुने गए शहरी घनी आबादी वाले क्षेत्रों में गुडगांव-मानेसर फरीदाबाद-बल्‍लभगढ, गाजियाबाद-लोनी, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मेरठ और सोनीपत-कुंडली सहित एक मिलियन और इससे अधिक की आबादी वाले एनसीटी-दिल्‍ली के बाहर 7 मेट्रो केन्‍द्र/परिसर सम्‍मिलित हैं और 11 क्षेत्रीय केन्‍द्र/परिसर अर्थात बहादुगढ, पानीपत, रोहतक, पलवल, रिवाडी-धारुहेडा-बावल, हापुड-पिलखुआ, बुलंदशहर-खुर्जा, बागपत-बडौत, अलवर, ग्रेटर भिवाडी और शाहजहांपुर-नीमराणा-बहरोर सम्‍मिलित हैं।
  
राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना – 2021 में तीन प्रकार की अवसंरचना जरुरतों की पहचान की गई – पहली, क्षेत्रीय स्‍तर पर विद्युत, राजमार्गों, रेलवे आदि में बडे विनियोग, दूसरे, अन्‍तरराज्‍यीय सम्‍बद्धता और पर्यावरण विनियोग और तीसरा, शहर स्‍तरीय शहरी विनियोग। योजना में यह अनुमान लगाया गया है कि राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में गुणवत्‍ता युक्‍त अवसंरचना के विकास के लिए 2021 तक परिवहन, विद्युत, जल, सीवरेज और स्‍वच्‍छता में लगभग 193752 करोड रुपए के विनियोग की आवश्‍यकता होगी; इसमें आवासीय/वाणिज्‍यिक/औद्योगिक/संस्‍थात्‍मक परियोजनाओं के लिए भूमि विकास में होने वाले विनियोग शामिल नहीं हैं।

राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अवसंरचना विकास के लिए निधियां पीपीपी के माध्‍यम से निजी क्षेत्र के विनियोगों के अतिरिक्‍त, उप-क्षेत्रीय, क्षेत्रीय और राष्‍ट्रीय हित वाली विभिन्‍न परियोजनाओं के साथ सरकार के सभी तीन स्‍तरों से प्राप्‍त होंगी। एनसीआर के विकास के लिए एक नोडल अभिकरण होने के नाते एनसीआरपीबी से यह आशा की जाती है कि वह स्‍थानीय, क्षेत्रीय और राज्‍यव्‍यापी अवसंरचना पहल में अग्रणी होगा ताकि राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास के लक्ष्‍यों के लिए अनिवार्य योजना और अवसंरचना का विकास और संवितरण सुनिश्‍चित किया जा सके।

वैश्‍विक दृष्‍टि से श्रेष्‍ठ क्षेत्र के रुप में विकास करने की राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र की दृष्‍टि को वास्‍तविक रुप से सही मायनों में धरातल पर परिलक्षित करने के उद्देश्‍य से अधिक कारगर ढंग से भूमिका निभाने के लिए, राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड को अवसंरचनात्‍मक परियोजनाओं के वित्‍तीयन में अत्‍यधिक वृद्धि करने की जरुरत है, जिसमें क्षेत्रीय योजना-2021 में अभिज्ञात दबाव के क्षेत्रों में एक से अधिक राज्‍यों को लाभ प्रदान करने वाली अंतर्राज्‍यीय परियोजनाएं सम्‍मिलित हैं। बोर्ड ने राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के शहरी/अर्ध-शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों में 11वीं योजना अवधि और इसके बाद वित्‍तीयन के लिए 100% सीवरेज विकास, ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन, एकीकृत जल आपूर्ति, नए टाउनशिपों, सडक नेटवर्कों, क्षेत्रीय रेपिड ट्रांजिट प्रणाली और विद्युत ट्रांसमिशन एवं वितरण प्रणाली के क्षेत्र में अवसंरचनात्‍मक परियोजनाओं की पहचान की है। बोर्ड ने इन परियोजनाओं पर 15000 करोड रुपए के कुल विनियोग का अनुमान लगाया है, जिसमें से राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड का अंश का अनुमान लगभग 11000 करोड रुपए है।

उपर्युक्‍त विभिन्‍न क्षेत्रों में निधियों का विनियोग करने की दृष्‍टि से एनसीआरपीबी निधियों की व्‍यवस्‍था एनसीआरपीबी को किए जाने वाले उच्‍च बजटीय आबंटन के माध्‍यम से और बहु-पक्षीय/द्विपक्षीय निधियन एवं पूंजी बाजार आदि जैसे अन्‍य स्रोतों से निधियां जुटाने के माध्‍यम से कर रहा है।

विषय-सामग्री स्‍वामित्‍व, संयमन एवं अनुमोदन नीति (सीओएमएपी)
विषय-सामग्री समीक्षा नीति (सीआरपी)
विषय-सामग्री अभिलेखीय नीति
सुरक्षा नीति