राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड
( शहरी विकास मंत्रालय ,भारत सरकार )
नया क्‍या है English

व्यापक ऋण दिशानिर्देश
  1. प्रस्‍तावना
  2. कवरेज और पात्र ऐजेंसियां
  3. वित्त-पोषण के लिए पात्र परियोजनाओं के प्रकार
  4. शर्तें
  5. परियोजना रिपोर्ट
  6. परियोजना प्रस्‍ताव का प्रस्‍तुतीकरण
  7. परियोजना मूल्‍यांकन
  8. तकनीकी और वित्तीय मूल्‍यांकन
  9. परियोजना कार्यान्‍वयन के चरण बनाना
  10. मंजूरी की विधि
  11. ऋण की विमुक्ति
  12. सामान्‍य शर्तें
  13. निगरानी मानीटरिंग और मूल्‍यांकन

प्रस्‍तावना

1985 में हरियाणा, राजस्‍थान और उत्तर प्रदेश को विधान सभाओं की सहमति से संसद के एक अधिनियम के माध्‍यम से एनसीआर योजना बोर्ड बनाया गया।

इस बोर्ड के पास राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास और ऐसी योजना के कार्यान्‍वयन में तालमेल बिठाने और निगरानी तथा राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भूमि दुपयोगो के नियंत्रण और अवस्‍थापना के विकास के लिए सुमेलित नीतियों को तैयार करने के लिए एक योजना बनाने का अधिदेश है ताकि इसके अत्‍यवस्थित विकास रोका जा सके।

एनसीआरपीबी अधिनियम के धारा 7 (ङ) में यथापरिभाजित इस बोर्ड के कार्यों में से एक कार्य राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में चयनित विकास परियोजनाओं और वित्त पोषण की व्‍यवस्‍था और निरीक्षण करना है। इस परियोजन के लिए इस अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत एनसीआर योजना बोर्ड कोष बनाया गया है जिसमें अन्‍य बातों के साथ-साथ निम्‍नलिखित के लिए उपयोग किया जाना अपेक्षित हैं:-

‘भागीदार राज्‍यों और संघ राज्‍य क्षेत्रों को उप-क्षेत्रीय योजनाओं और परियोजना योजनाओं के कार्यान्‍वयन के लिए सहायता प्रदान करना’; और

‘संबंधित राज्‍य को ऐसी शर्तों के अधीन काउंटर मेग्‍नेट क्षेत्र के विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना जैसी की ऐसी राज्‍य और बोर्ड के बीच में सहमति हुई हो।’

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कवरेज और पात्र ऐजेंसियां

इस बोर्ड, एनसीआर के भागीदार राज्‍यों और उनकी कार्यान्‍वयन ऐजेंसियों द्वारा राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र और काउंटर मेग्‍नेट क्षेत्रों (सीएमएज़) में शुरु की जाने वाली विकास परियोजनाओं का पता लगाया जाएगा। .

यह बोर्ड, स्‍थानिय निकायों, विकास प्राधिकरणों, आवास बोर्डों, औद्योगिक विकास निगमों, अथवा राज्‍य सरकार की ऐसी ऐजेंसियों, जैसे भी मामला हो, समेत भागीदार राज्‍य सरकारों और उनकी कार्यान्‍वयन ऐजेंसियों को वित्तीय सहायता प्रदान कर सकता है।

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वित्त-पोषण के लिए पात्र परियोजनाओं के प्रकार

इस बोर्ड द्वारा संसाधनों की उपलब्‍धता के आधार पर निम्‍नलिखित प्रकार की परियोजानाओं का वित्त-पोषण करने के लिए विचार किया जाएगा:-

  • औद्योगिक, संस्‍थागत, आवासीय और वाणिज्यिक उपयोगों के लिए सामाजिक और भौतिक अवस्‍थापना परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और विकास;
  • जलापूर्ति, सीवरेज, सीवेज निपटान, जल निकासी, ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन, विद्युत आपूर्ति, एक्‍सप्रेस वेज़ रेलवे, क्षेत्रीय/उपक्षे‍त्रीय/मास्‍टर योजना, सड़को और पुलों, दुग्‍ध डेयरियों अग्निशमन सेवाओं, पार्कों और खेल के मैदानों, स्‍टेडियमों इत्‍यादि जैसी विद्यमान अवस्‍थापना का उन्‍नयन और विस्‍तार;
  • धनराशि, ब्‍याज की दर, स्रोत और पुनर्भुगतान की अवधि, मूल ऋण की तारीख और आवेदन की तारीख को ऋण (ऋणों) के लिए बकाया धनराशि और प्रतिभूति के रूप में दी गई परिसंपत्तियों, यदि कोई हों, को इंगित करते हुए प्रस्‍तावित परियोजना के लिए केंद्र सरकार, राज्‍य सरकार अथवा अन्‍य एजेंसियों से लिया गया ऋण अथवा ऋणों। इस परियोजना के लिए प्रस्‍तुत प्रतिभूति;
  • रंगशालाओं, प्रेक्षाग्रहों, सम्‍मेलन/प्रदर्शनी भवनों, हस्‍तशिल्‍पों/हाट बाजारों इत्‍यादि जैसी सुविधा केंद्रों वाले कला और सांस्‍कृतिक केंद्रों का विकास;
  • काउंटर मेग्‍नेट क्षेत्रों में अवस्‍थापना और अन्‍य विकास संबंधि परियोजनाएं;
  • ग्रामीण विकास पर प्रायोगिक परियोजनाएं
  • नए कस्‍बों का विकास
  • परियोजना स्‍वीकृति और निगरानी दलों के अनुमोदन से ऐसी अन्‍य परियोजनाएं जो क्षेत्रीय योजना के उद्देश्‍यों के अनुरूप हों।
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शर्तें

वित्तीय पेटर्न

यह बोर्ड 75% अनुमानित लागत तक किसी परियोजना के लिए ऋण प्रदान करेगा और शेष धनराशि का अंशदान राज्‍य सरकार और उनकी कार्यान्‍वयन ऐजेंसी द्वारा किया जाएगा।

ऋण और ब्‍याज का पुनर्भुगतान

सामान्‍य तथा गैर-लाभकारी अवस्‍थापना (वाणिज्यिक परियोजना को छोड़कर) परियोजनाओं के लिए दस वर्ष तथा लाभकारी/वाणिज्यिक परियोजनाओं के लिए 7 वर्षों की अधिकतम अवधि के भीतर ब्‍याज सहित ऋण धनराशि का पुनीर्भुगतान किया जाएगा। तथापि, पीएसएमजी इन सीमाओं से अधिक पुनर्भुगतान की अवधि की स्‍वीकृति दे सकते हैं। इसके साथ-साथ पीएसएमजी सुपात्र मामलों में मूल धन राशि के पुनर्भुगतान के लिए दो वर्षों की अधिकतम अवधि तक ऋणस्‍थगन की स्‍वीकृति भी दे सकते हैं ऋण का पुनर्भुगतान वार्षिक आधार पर होगा और यह अवधि ऋण की धनराशि को जारी करने की धनराशि से गिनी जाएगी। ब्‍याज के भुगतान पर कोई ऋण स्‍थगन नहीं होगा अथात् दो वर्षों के ऋण-स्‍थगन के मामले में मूल धन राशि का पहला पुनर्भुगतान तीसरी वर्षगांठ से शुरु होगा जबकी ब्‍याज का भुगतान ऋण की पहली वर्षगांठ से शुरु होगा।

ऋण करार

स्‍थानिय प्राधिकरणों, शहरी विकास प्राधिकरणों, आवास बोर्डों और राज्‍य सरकारों को छोड़कर ऐसी अन्‍य ऐजेंसियों को ऋणों के मामले में इस बोर्ड द्वारा निर्धारित फार्म में एक ऋण करार को निष्‍पादित किए जाने की आवश्‍यकता होगी।

ऋणों के लिए प्रतिभूति

स्‍थानीय निकायों, शहरी विकास प्राधिकरणो, आवासीय बोर्डों और निकायों/राज्‍य सरकारों को छोड़कर अन्‍य संस्‍थानों को ऋण केवल पर्याप्‍त प्रतिभूति के विरुद्ध स्‍वीकृत किया जाएगा। ली गई प्रतिभूति सामान्‍यत: ऋण की कम से कम 33.33 प्रतिशत धनराशि से अधिक की होगी, बशर्ते कि बोर्ड प्रतिभूति के बदले राज्‍य की गारंटी स्‍वीकार्य करें।

उपर्युक्‍त पर्याप्‍त प्रतिभूति में पीएसएमजी के अनुमोदन की शर्त पर बैंक गारंटी, निलम्‍बलेख लेखों इत्‍यादि जैसी अन्‍य असूल की जा सकने वाली आय/परिसम्‍पतियां भी शामिल हो सकती हैं।

भुगतान में देरी

ऋण अथवा ब्‍याज के भुगतान में किसी देरी के मामले में इस बोर्ड द्वारा ब्‍याज की सामान्‍य दर के अतिरिक्‍त यथा सूचित दंडनीय ब्‍याज भी लिया जाएगा। इस समय दंडनीय ब्‍याज की दर 2.75% प्रति वर्ष है।

ऋण का पूर्व-भुगतान

इस बोर्ड द्वारा ऋण के पूर्व-भुगतान की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक कि इस बोर्ड द्वारा विशेष मामलों में बोर्ड द्वारा निर्णीत शर्तों पर कोई अन्‍यथा निर्णय नहीं ले लिया जाए।

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परियोजना रिपोर्ट

ऋणी अभिकरण एक व्‍यवहार्यता अध्‍ययन रिपोर्ट, जहीं कहीं भी आवश्‍यक हो, सहित इस बोर्ड को एक विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रस्‍तुत करेगा। इस डीपीआर में निम्‍नलिखित पहलू शामिल होंगे:-

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(क) तकनीकी पहलू

(i) सामान्‍य सूचना

एनसीआर योजना में लक्ष्‍य क्षेत्र/कस्‍बे के लिए निर्धारित समग्र उद्देश्‍यों और क्षेत्र विकास योजना के अनुरूप उनको पूरा करने के संदर्भ में परियोजना की स्थिति का वर्णन करने वाला एक संक्षिप्‍त नोट।

(ii)परियोजना के लिए औचित्‍य

मांग सर्वेक्षण निष्‍कर्षों द्वारा विधिवत समर्थित परियोजना के लिए औचित्‍या प्रस्‍तावित क्षेत्र में इसकी उपयोगिता स्थिति सहित इसी प्रकार की प्रवृत्ति भी विद्यमान स्‍मीमों, यदि कोई हों, की स्थिति दी जानी चाहिए।

(iii) क्षेत्रीय योजना/मास्‍टर प्‍लान/स्‍थानीय योजना कानूनों/राष्‍ट्रीय भवन इत्‍यादि में अनुरूपता

यह परियोजना क्षेत्रीय योजना, उप-क्षेत्रीय योजना/क्रियात्‍मक योजना/जिला योजना और कस्‍बे/शहर की मास्‍टर प्‍लान से भी अनुरूप होनी चाहिए। प्रस्‍तुत लेआऊट योजना को स्‍थानीय भवन निर्माण उप-नियमों का अनुपालन करना चाहिए और साथ ही उसको सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित भी किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्‍त चूंकि राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र भारतीय मानक, 1893 के भू-कम्‍पीय जोन नक्‍शे के अनुसार उच्‍च भूकपीय जोन IV के अंतर्गत और VIII की एमएस के तीव्रता के उच्‍च जोखिम जोन में भी आता है। अत: सभी संरचनाओं (भवनों) को राष्‍ट्रीय भवन निर्माण कोड, भारतीय मानक ब्‍यरो के अन्‍य उपयुक्‍त कोडों और लागू अन्‍य उपयुक्‍त उपबंधों के अनुरूप होना चाहिए।

iv) स्‍थल पर स्थितियां

किसी स्‍थल योजना द्वारा समर्थित स्‍थलाकृति, मृदा स्थिति, प्राकृतिक और मानवनिर्मित विशेषताओं, परिरेखाओं और उपलब्‍ध परिवहन संबंध और अन्‍य अवस्‍थापना नेट वर्क के अनुसार स्‍थल का सामान्‍य विवरण। इस परियोजना स्‍थल को स्‍पष्‍ट रूप से विकास/मास्‍टर प्‍लानों, उप-क्षेत्रीय प्‍लानों अथवा क्षेत्रीय योजना, जैसा भी मामला हो, पर चिन्हित किया जाना चाहिए।

v) सेवा उपलब्‍धता

राज्‍य सरकार के संबंधित अभिकरणों के दस्‍तावेजों द्वारा विधिवत् समर्थित विद्यमान जलापूर्ति, सीवरेज, सीवेज शोधन, ठोस अपशिष्‍ट स्‍थलों, जल-निकासी, विद्युत, परिवहन, दूर-संचार इत्‍यादि की स्थिति दी जानी चाहिए।

(vi) लेआऊट योजना

परियोजना रिपोर्ट सहित स्‍थानिय नियोजन अभिकरण/अधिकृत अभिकरण द्वारा विधिवत् अनुमोदित समुचित पैमाने में स्‍थल योजना के साथ एक विस्‍तृत लेआऊट प्‍लान प्रस्‍तुत की जानी चाहिए।

vii) परियोजना घटक

भूमि अधिग्रहण सर्वेक्षण लेवलिंग, जलापूर्ति, सीवरेज, वर्षा-जल निकासी, ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन, सड़कों, पुलियों, भूदृश्‍य, विद्युतीकरण, सामुदायिक सुवि‍धाओं इत्‍यादि समेत भूमि विकास जैसे परियोजना के विभिन्‍न घटकों को प्रत्‍येक घटक के लिए अनुमानित लागत और समय-सीमा सहित मात्रात्‍मक शर्तों/शब्‍दों में दिया जाना चाहिए।

viii) भू-खंडों का विवरण

आकारों सहित भू-खंडों का विवरण दिया जाना चाहिए। भू-खंडों के आकार स्‍थानीय नियोजन कानूनों के अनुसार होने चाहिए और राज्‍य/स्‍थानीय मानदंडों के अनुसार भू-खंड आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए निश्चित किए जाने चाहिए जिनको रियायती दरों पर आबंटित किया जाएगा।

ix) कार्यान्‍वयन अभिकरण

परियोजना/परियोजना घटकों के लिए कार्यान्‍वयन अभिकरण (अभिकरणों) को इंगित किया जाना चाहिए। संसाधन उगाहने के लिए इसके कार्यों, शक्तियों और साथ ही परियोजना के निष्‍पादन के लिए प्रस्‍तावित जनशक्ति समेत इस संगठन के अन्‍य विवरण प्रस्‍तुत किए जाएंगे। पता लगाए जाने वाले इस परियोजना के नोडल अधिकारी और इसका नाम, पदनाम, संपर्क संख्‍याओं और कार्यालय के पते को इंगित किया जाए।

x) कार्यान्‍वयन कार्यक्रम

विभिन्‍न कार्यकलापों के संपर्कों और निर्भरता को दर्शाते हुए प्रबंधन पद्धति के अनुसार एक कार्यान्‍वयन कार्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए। इसमें विस्‍तृत डिजाइन और ड्राइंगों को तैयार करने, अतिरिक्‍त क्षेत्रीय जांचों, निविदा दस्‍तावों जो को तैयार करने के लिए अपेक्षित समय, कार्य देने, वास्‍तविक विकास/निर्माण अवधि, सामग्री और उपकरण के क्रय/अधिप्रापण के लिए अपेक्षित अवधि, सुविधा केंद्रों को चालू करने इत्‍यादि की अवस्‍थाओं को ध्‍यान में रखते हुए सभी परियोजना घटकों का एक विस्‍तृत और वास्‍तविक कार्यान्‍वयन कार्यक्रम भी होना चाहिए।

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(ख) वित्तीय पहलू

i) लागत अनुमान

सभी लागत अनुमान तैयार करने के लिए अपनाई गई दरें लागत वृद्धि यदि हो, के एक प्रावधान सहित अद्यतन लोक निर्माण विभाग/केंद्रीय लोक निर्माण विभाग अथवा संबंधित राज्‍य में लागू कोई अन्‍य दरों की अनुसूची (एसओआर) के अनुसार होना अपेक्षित है। कार्यान्‍वयन अभिकरण यह अवश्‍य ही प्रमाणित करना चाहिए कि ये अनुमान सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किए गए हो।

ii) निधियों का स्रोत

इस परियोजना को पूरा करने के लिए यथा नियोजित व्‍यय को पूरा करने हेतु इस परियोजना के कार्यान्‍वयन के लिए निधियों के सभी स्रोतों को इंगित किया जाएगा।

iii) नकद प्रवाह विवरण

इस परियोजना रिपोर्ट में आवेदन फॉर्म में दिए गए प्रपत्र के अनुसार वर्ष-वार राजस्‍व और व्‍यय को दर्शाने वाला नकद प्रवाह विवरण शामिल होगा जो अनुलग्‍नक – II में संलग्‍न है।

iv) वित्तीय व्‍ययहार्यता

इन परियोजनाओं की वित्तीय व्‍यवहार्यता का हिसाब कटौती पर नकद प्रवाह की तकनीकों की आधार पर लगाया जाएगा और शुद्ध वर्तमान मूल्‍य (एनपीवी), लागत लाभ अनुपात (सीबीआर) और वित्तीय आंतरिक लाभ दर (एफआईआरआर) देनी चाहिए। गैर-लाभकारी परियोनाओं के मामले में यह अभिकरण लाभों। निधियों के स्रोत इंगित करेगा जो परियोजना को ऋण धनराशि की आपूर्ति करने के लिए व्‍यवहार्य बनाता है।

v) ऋण निकासी और पुनर्भुगतान कार्यक्रम

मूलधन और ब्‍याज के लिए पुनर्भुगतान कार्यक्रम सहित बोर्ड से निकाली जाने वाली ऋण की वर्ष-वार धनराशि और इसके साथ-साथ मूल धनराशि के पुनर्भुगतान के लिए अपेक्षित ऋण-स्‍थगन की अवधि इंगित की जाएगी।

vi) पूरक सूचना

राज्‍य सरकारों को छोड़कर अभिकरणों से वित्तीय सहायता के लिए किसी आवेदन पर विचार करने से पहले सामान्‍य वित्तीय नियमों, भारत सरकार के नियम 155 के अंतर्गत यथानिर्धारित निम्‍नलिखित दस्‍तावेज प्रस्‍तुत किए जाएंगे:-

  • पिछले 3 वर्षों के लाभ व हानि (अथवा आय व व्‍यय) लेखों और तुलन पत्रों की प्रतियां*।
  • ऋण के लिए प्रस्‍तुत की जाने वाली प्रस्‍तावित प्रतिभूति और इस आशय का एक प्रमाण-पत्र कि प्रतिभूति के रूप में पेश की परिसंपत्ति पहले से ही ऋण-गस्‍त नहीं हुई हो।
  • धनराशि, बयाज की दर, पुनर्भुगतान का स्रोत और अवधि, मूल ऋण की तारीख और आवेदन की तारीख और प्रेतिभूति के रूप में दी गई परिसंपतियां, यदि कोई हों, को ऋण (ऋणों) के लिए बकाया धनराशि को इंगित करते हुए इस परियोजना के लिए प्रस्‍तुत की गई प्रस्‍तावित परियोजना/प्रतिभूति के लिए केंद्र सरकार, राज्‍य सरकार और अन्‍य अभिकरणों से लिए गए ऋण अथवा ऋणों का विवरण;
  • आवेदन की तारीख को सभी अन्‍य ऋणों, बकायों की एक पूरी सूची और उनके लिए प्रतिभूति के रूप में दी गई परिसंपत्तियां;

* अभिकरणों को प्रत्‍येक संगत वित्तीय वर्ष के लिए बोर्ड को केवल एक बार इन दस्‍तावेजों को प्रस्‍तुत करने की आवश्‍यकता है।

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परियोजना प्रस्‍ताव का प्रस्‍तुतीकरण

(क) एनसीआर में परियोजनाओं के लिए

ऋण लेने वाले/कार्यान्‍वयन अभिकरण को विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट, समर्थक/पुष्टि करने वाले दस्‍तावेजों इत्‍यादि सहित निर्धारित आवेदन प्रपत्र (इन दिशा-निर्देशों के साथ अनुलग्‍नक - II पर संलग्‍न) में बोर्ड को एक प्रति सहित भागीदार राज्‍यों के अपने-अपने एनसीआर योजना और निगरानी कक्षों को परियोजना प्रस्‍ताव करना चाहिए। इन कक्षों को बोर्ड को इस परियोजना का मूल्‍योंकन करने के पश्‍चता् और इसके साथ-साथ कस्‍बे की क्षेत्रीय/उप-क्षेत्रीय/कार्यात्‍मक योजना और मास्‍टर प्‍लान से इसकी अनुरूपता की जांच करने और इसके संदर्भ में परियोजना की उपयुक्‍तता और उपयोगिता लिए भी उनकी टिप्‍पणियों और सिफारिशों सहित परियोजना प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करना चाहिए।

(ख) सीएमएज में परियोजनाओं के लिए

ऋण लेने वाले/कार्यान्‍वयन अभिकरणों को बोर्ड को राज्‍य सरकारों द्वारा निम्‍नलिखित कार्रवाईयां करने के पश्‍चात् परियोजना प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करना चाहिए:

  • काउंटर मेग्‍नेट कस्‍बे के लिए विकास योजना को अंतिम रूप देना।
  • कस्‍बे के स्‍तर पर परियोजना स्‍वीकृति समितिका गठन और एनसीआर योजना और निगरानी कक्षों और बोर्ड द्वारा परियोजना प्रस्‍ताव का अनुमोदन
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परियोजना मूल्‍यांकन

बोर्ड द्वारा तकनीकी व्‍यवहार्यता, वित्तीय व्‍यवहार्यता, परियोजनाओं इत्‍यादि के कार्यान्‍वयन के लिए संगठनात्‍मक क्षमता के संदर्भ में विस्‍तृत परियोजना मूल्‍यांकन शुरू किया जाएगा।

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तकनीकी और वित्तीय मूल्‍यांकन

यह बोर्ड तकनीकी व्‍यवहार्यता और वित्तीय व्‍यवहार्यता के संदर्भ में परियोजना रिपोर्टों की जांच करेगा। परियेाजनाओं का मूल्‍यांकन करते समय यह बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि:

  • प्रस्‍तावित परियोजनाएं क्षेत्रीय योजना के उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करने में सहायता करेंगी;
  • परियोजनाएं क्षेत्रीय/उप-क्षेत्रीय/कार्यात्‍मक योजना, मास्‍टर प्‍लान प्रस्‍तावों इत्‍यादि से अनुरूप हों;
  • वे सेवाओं और उपयोगिताओं के संदर्भ में कस्‍बे/क्षेत्र की वर्तमान और भावी आवश्‍यकताएं पूरी करें;
  • तकनीकी पैरा मीटरों के विनिर्देशन सही/ विवेकपूर्ण, वास्‍तविक और तकनीकी रूप से व्‍यवहार्य हों;
  • लागत अनुमान संबंधित राज्‍यों के लोक निर्माण विभाग/केंद्रीय लोक निमार्ण विभाग की अद्यतन दरों की सामान्‍य अनुसूची (सीएसआर) के अनुसार तैयार की गई हों;
  • समग्रत: परियोजना व्‍यवहार्य हो और कार्यान्‍वयन अभिकरण ऋण का पुनर्भुगतान करने की स्थिति में होगा;
  • कार्यान्‍वयन अभिकरण की रिपोर्ट में दिए गए कार्यान्‍वयन कार्यक्रम के अनुसार परियोजना को निष्‍पादन करने के लिए ठोस/युक्तियुक्‍त संगठनात्‍मक क्षमता हो; और
  • किसी प्रतिकूल प्रमाण को कम से कम करने के लिए पर्यावरणात्‍मक प्रभावों, यदि कोई हो, का ध्‍यान रखा जा रहा हो;
  • उपर्युक्‍त शामिल नहीं की गई अन्‍य शर्तें अनुमोदित सरकारी नीतियों के अनुसार होंगी;
  • मूल्‍यांकन रिपोर्ट का सार संबंधित परियोजना स्‍वीकृति और निगरानी दल के समक्ष विचार और अनुमोदनार्थ रखा जाएगा।
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परियोजना कार्यान्‍वयन के चरण बनाना

जब तक कि पीएसएम जी द्वारा अन्‍यथा विनिर्दिष्‍ट नहीं किया जाए परियोजनावधि अधिनियम पांच वर्ष तक ही सीमित की जाएगी।

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मंजूरी की विधि

मूल्‍यांकन रिपोर्ट पर बोर्ड द्वारा प्रत्‍यायोजित वित्तीय शक्तियों के अनुसार संबंधित परियोजना स्‍वीकृति और निगरानी दल (पीएसएमजी-I अथवा पीएसएमजी- II) द्वारा विचार किया जाएगा।

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ऋण की विमुक्ति

पीएसएमजी-I अथवा पीएसएमजी- II द्वारा परियोजनाओं की स्‍वीकृति के पश्‍चात् बोर्ड शर्तों के साथ स्‍वीकृत ऋण का विवरण देते हुए राज्‍य सरकार/कार्यान्‍वयन अभिकरणों को स्‍वीकृति पत्र जारी करेगा। राज्‍य सरकार/कार्यान्‍वयन अभिकरणों को इन दिशा-निर्देशों में यथा-निर्धारित गारंटी को प्रस्‍तुत करने सहित ऋण करारों के निष्‍पादन समेत सभी औपचारिकताएं पूरी करना अपेक्षित है। इन औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए समय समी सामान्‍यत या बोर्ड द्वारा स्‍वीकृति पत्र जारी करने की तारीख से 3 महीने की होगी। एक बार दस्‍तावेज बनाने का कार्य पूरा हो जाए, तो बोर्ड राज्‍य सरकारों/ कार्यान्‍वयन अभिकरणों को ऋण की पहली किस्‍त जारी करेगा।

प्रत्‍येक किस्‍त को बोर्ड द्वारा एक पृथक ऋण के रूप में समझा जाता है।

बोर्ड द्वारा सदस्‍य सचिव के अनुमोदन से निमनलिखित शर्तों अधीन ऋण सहायता की बाद की किस्‍तों को जारी किया जाएगा:-

  • कार्यान्‍वयन अधिकरण बोर्ड द्वारा पहले जारी किए गए कम से कम 80% ऋण और राज्‍य/अभिकरण को एक साथ रखते हुए प्रति भाग हिस्‍से के लिए अनुलग्‍नक- IV में दिए गए अनुसार निर्धारित फार्म में समुपयोजन प्रमाण-पत्र प्रस्‍तुत करेगा। तथापि, प्रतिभाग राज्‍य/एजेंसी के साथ एक साथ रखते हुए केवल 100% धनराशि के लिए यदि समुपयोजन प्रमाण-पत्र के पश्‍चात्त ही पिछली अंतिम किस्‍त धनराशि जारी की जागगी तो बोर्ड को राज्‍य/अभिकरण का हिस्‍सा प्राप्‍त होगा।
  • निर्धारित प्रपत्र में तिमाही भौतिक और वित्तीय प्रगति रिपोर्ट का प्रस्‍तुतीकरण जैसाकि अनुलग्‍नक –v में दिया गया है, और
  • बोर्ड/योजना कक्षों के अधिकारियों अथवा बोर्ड द्वारा अधिकृत किसी अन्‍य अभिकरण द्वारा प्रगति की वास्‍तविक और वित्तीय सत्‍यापन और इसकी संतोषजनक रिपोर्ट।
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सामान्‍य शर्तें

राज्‍य सरकार और/अथवा उनके कार्यान्‍वयन अभिकरणों द्वारा बोर्ड से ऋण सहायता निकालने के लिए निम्‍नलिखित शर्तों का अनुपालन किया जाएगा।

उन परियोजनाओं जहां पर भूमि अधिग्रहण के लिए प्रदान की गई वित्तीय सहायता की धनराशि भूमि अधिग्रहण के लिए उपयोग की गई वास्‍तविक धनराशि से अधिक हो, के मामले में ऐसी अधिक धनराशि को परियोजना पर विकास कार्यों के लिए धन हेतु समायोजित किया जाएगा अथवा बाद की ऋण किस्‍तों की धनराशि को तद्नुसार समायोजित किया जाएगा, जैसा की मामला हो।

भूमि विकास

भूमि विकास के मामले में ऋण धनराशि को निम्‍नलिखित शर्तों के अधीन जारी किया जाएगा:-

  • राज्‍य सरकार/कार्यान्‍वयन अभिकरण यह प्रमाणित करेगा कि संपूर्ण भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है और पूरा वास्‍तविक/भौतिक कब्‍जा ले लिया गया है।
  • भूमि विकास के लिए धन जारी करने से पहले बोर्ड/ एनसीआर योजना और निगरानी कक्ष यह सुनिश्चित करने की दृष्टि से स्‍थल का निरीक्षण करेंगे कि भूमि सभी बाधाओं से मुक्‍त है और यह आगे परियोजना विकास के लिए राज्‍य सरकार/कार्यान्‍वयन अभिकरणों के कब्‍जे में है।
  • कार्यान्‍वयन अभिकरण इस आशाय का प्रमाण-पत्र देना होगा कि इस स्‍कीम के सभी घटकों के लिए विस्‍तृत अनुमानों को सक्षम प्राधिकारी द्वारा तकनीकी रूप से स्‍वीकृत कर लिया गया है। (ऐसे पत्र की एक प्रति प्रस्‍तुत की जाएगी)
  • कार्यान्‍वयन अभिकरण को इस आशय का एक प्रमाण-पत्र देना होगा कि सभी घटकों के लिए निविदाएं या तो आमंत्रित कर ली गई हैं तथवा अनुसूची को विनिर्दिष्‍ट करते हुए ये मांगने की प्रक्रिया में हैं।

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सामान्‍य

  • ऋणी सभी संबंधित परियोजनाओं के लिए प्राप्तियों और व्‍यय के पृथक लेखे बनाए रखेगा और हर वर्ष बोर्ड को ऋण को सभी अन्‍य देय राशियों के साथ पूरी तरह से वापिस करने तक अनुलग्‍नक-VI में दिए गए प्रपत्र के अनुसार लेखों की वार्षिक रिपोर्ट प्रदान करेगा।
  • ऋणी बोर्ड की पूर्वानुमति के बिना ऋण के किसी भाग/जमाओं, ऋणों, अंश पूंजी अथवा अन्‍यथा के जरिए स्‍वीकृत धनराशि का निवेश नहीं करेगा।
  • ऋणी बोर्ड/ एनसीआर योजना और निगरानी कक्षों और अथवा इसके अधिकृत एजेंटों के निरीक्षण के लिए बोर्ड द्वारा यथा अपेक्षित अथवा ऋणी के लागू कानून उप-नियमों अथवा नियमों के अंतर्गत अपेक्षित अपनी सभी लेखा- बहियों और अन्‍य पुस्‍तकों और दस्‍तावेजों को अपलब्‍ध करावाएगा और बोर्ड और/ अन्‍यथा इसके अधिकृत एजेंट को ऐसा निरीक्षण करनेके लिए सभी सुविधाएं प्रदान करेगा और ऐसा स्‍पष्‍टीकरण अथवा व्‍याख्‍या प्रदान करेगा जो बोर्ड और अथवा इसके अधिकृत एजेंट द्वारा अपेक्षित हो सकते हैं और बोर्ड और/ अथवा इसके अधिकृत एजेंट को उसकी कोई प्रति/प्रतियों/अथवा उधरण लेने देगा और उनको किसी भी समय उनसे संबंधित स्‍कीमों के किसी अथवा सभी स्‍थानों और सभी बैंक लेखों के रिकार्डों और दस्‍तावेजों का निरीक्षण करने का अधिकार होगा। बोर्डके पास इसक/अथवा इसके नामिति (नामितियों) के द्वारा स्‍कीमों के निरीक्षण, लेखा-बहियों इत्‍यादि के निरीक्षण के संबंध में इसके द्वारा ऋणी से खर्च किए गए सभी व्‍ययों की पूरी धनराशि वसूल करने का अधिकार आरक्षित है।
  • एक परियोजना के लिए जारी की गई निधियों को अन्‍य परियोजना के लिए नहीं मोड़ा जाएगा और ऋण लेने वाले अधिकरण को अवश्‍य ही प्रत्‍येक परियोजना के लिए लेखों की बहियों को अलग से बनाए रखना चाहिए।
  • राज्‍य सरकारों को छोड़कर अभिकरणों को ऋण के मामले में इस आशय की एक लिखित बचन- बद्धता कि इस परियोजना के लिए बोर्ड द्वारा प्रदान की गइ वित्तीय सहायता में से सृजित परिसंपत्तियों को बोर्ड को ऋण और उस पर ब्‍याज का भुगतान करने तक बोर्ड के पूर्वानुमोदन के बिना किसी अन्‍य ऋणदाता को बंधक नहीं रखा जाएगा/से नहीं लिया जाएगा।
  • यह बोर्ड संस्‍था के अंतर्नियम, निगमीकरण का प्रमाण-मत्र, ऋणी के उप-नियम इत्‍यादि जैसे महत्‍वपूर्ण सूचना भी मांग सकता है।
  • कार्यान्‍वयन अभिकरण यह सुनिश्चित करेंगे कि बोर्ड के पूर्वानुमोदन को छोड़कर स्‍वीकृत परियोजना से कोई विचलन/अंतर न हों।
  • यदि कार्यान्‍वयन अभिकरणों के नियंत्रण से परे कारणों की वजह से किसी परियोजना को पूरा करने में देरी होती है, तो वे बोर्ड का अनुमोदन मांगने और प्राप्‍त करने के लिए काफी समय पहले एक अंशोधित परियोजना प्रस्‍ताव करेंगे।
  • यदि परियोजना के निष्‍पादन की अवधि के दौरान कार्यान्‍वयन अभिकरण यह महसूस करता है कि इस परियोजना को स्‍वीकृत लागत की अपेक्षा अपेक्षाकृत कम लागत पर पूरा व्‍यवहार्य है, तो अधिक धनराशि को बोर्ड को तत्‍काल वापिस किया जाएगा।
  • कार्यान्‍वयन अभिकरण चल रही सभी परियोजनाओं के लिए निर्धारित फार्म में तिमाही आधार पर आवधिक प्रगति रिपोर्टें प्रस्‍तुत करेगा। कार्यन्‍वयन अभिकरण परियोजना के पूरा होने के पश्‍चात् पूर्णता प्रमाण-पत्र प्रस्‍तुत करेगा।
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निगरानी मानीटरिंग और मूल्‍यांकन

  • एनसीआर योजना बोर्ड के अधिकारियों और संबंधित राज्‍य सरकारों के एनसीआर योजना और निगरानी कक्षों द्वारा परियोजनाओं की निगरानी और मूल्‍यांकन किया जाएगा। कार्यान्‍वयन अभिकरणों द्वारा बोर्ड को भागीदार राज्‍यों के एनसीआर योजना कक्षों के माध्‍यम से निर्धारित प्रपत्रों में तिमाही प्रगति रिपोर्टें प्रस्‍तुत की जानी चाहिएं। एनसीआर कक्ष परियोजना रिपोर्टों की जांच/ छान‍बीन करेंगे और तिमाही के बाद महीने 15वीं तारीख तक अपनी टिप्‍पणियों सहित समेकित रिपोर्ट अग्रेषित करेंगे।
  • बोर्ड के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर व्‍यय सतयापन/जांच इत्‍यादि सहित परियोजनाओं का आवधिक निरीक्षण, लेखा खातों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके अतिरिक्‍त, बोर्ड द्वारा नियमित अंतरालों पर वास्‍वविक/भौतिक और वित्तीय प्रगति की समीक्षा की जाएगी। यह बोर्ड किसी बाह्य अभिकरण के माध्‍यम से ऐसी परियोजनाओं की उपयोगिता और क्षेत्र के समग्र विकास के बारे में ऐसी परियोजनाओं के प्रभाव की जांच करने के लिए पूरी की गई परियोजनाओं के प्रभाव मूल्‍यांकन अध्‍ययन भी कर अथवा करवा सकता है।

बोर्ड यदि परियोजना की प्रगति अथवा रखेजा रहे लेखों के तरीके संतुष्‍ट नहीं हो तो वह ब्‍याज सहित ऋण की वापिसी की मांग कर सकता है।

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